Who created God?
क्या प्रत्येक वस्तु को बनाने वाला होता है? यदि हाँ, तो ईश्वर का बनाने वाला कौन है?
उत्तर:- आप सभी ने यह तो अवश्य ही सुना होगा " सत्यमेव जयते" लेकिन विचारणीय यह है कि सत्य की विजय स्वयं होती है अथवा सत्य को जिताना पड़ता है। एक lawyer कोई केस इसलिए नहीं हारता की उसने गलत पक्ष को चुना, अपितु उसने केस की प्रस्तुति ठीक से नहीं की यह भी उसके हारने में एक मुख्य कारण होता है।
अपने मुख्य उत्तर में आने से पूर्व यह जानना अत्यन्त आवश्यक हो जाता है, की नास्तिक वर्ग की कोटि में कितने प्रकार के लोग आ सकते है, यह जानना इसलिए आवश्यक है कि उत्तर किसको देना है इसका भी परिज्ञान हमें अवश्य होना चाहिए। तो नास्तिक को हम निम्न भागों में बांट सकते हैं--
1) जो परंपरा से नहीं मानते( माता-पिता भी नास्तिक)
2) जो मानना चाहते नहीं
3)जो मानना चाहते हैं लेकिन तर्क की कसौटी पर
तो 1 और 2 भाग के नास्तिक को तो ईश्वर भी आके नहीं समझा सकता, हमारी और आपकी शक्ति ही क्या? अब बचे 3 भाग के नास्तिक, इन्हीं को समझाना हमारा मुख्य लक्ष्य होना चाहिए।।
उत्तर हेतु हमें दो बातों का और ध्यान होना चाहिए
1) प्रमाण :- जिससे किसी वस्तु के स्वरुप का ठीक ठीक ज्ञान होता है |
इसमें एक प्रमाण अर्थापत्ति का प्रयोग होगा जिसका तात्पर्य है, एक बात कहने से उससे संबंधित दूसरी बात बिना कहे समझ में आ जाना।
2) आज के भौतिक विज्ञान का कम से कम मोटा ज्ञान तो होना ही चाहिए।
जैसे:- आज का भौतिक विज्ञान इस बात को स्वीकार करता है कि मूल प्रकृति के कण अविभाज्य होंगे अर्थात अनादि( जो कभी उत्पन्न नहीं हुए और न कभी नष्ट होंगे)।
तो उत्तर समझने का प्रयास करते हैं,
प्रश्न का पहला भाग यह है कि क्या प्रत्येक वस्तु का कोई बनाने वाला होता है?? नास्तिक वर्ग की ओर से यह प्रश्न प्रायः उठाया जाता रहा है और इसका मुख्य कारण है आस्तिक वर्ग द्वारा उत्तर की गलत प्रस्तुति जैसे:- ईश्वर सिद्धि में प्रायः आस्तिक वर्ग यही भूल करते हैं कि प्रत्येक वस्तु का बनाने वाला कोई होता है, इस प्रश्न से अगला प्रश्न अवश्य ही उठेगा की फिर तो ईश्वर का बनाने वाला भी कोई होगा, इस प्रश्न पर आस्तिक दो उत्तर देते है:-
1) नहीं वो तो सदा से है
2) वह स्वयं बन गया
1 भाग का नास्तिक वर्ग यही उत्तर देता है कि जब वो सदा से है तो यह सँसार भी सदा से है उसका क्या काम?
2 भाग का वह यही उत्तर देते हैं कि, ठीक है यदि वह स्वयं बन सकता है तो फिर संसार को भी किसी की आवश्यकता नहीं, यह भी स्वयं बन गया होगा।
तो देखिए, गलत प्रस्तुति से कितने प्रश्न उठ गए, जिससे प्रश्न और उलझ गया। तो फिर क्या उत्तर होना चाहिए??
तो पहले भाग का उत्तर यह होना चाहिए:--
प्रश्न:- क्या प्रत्येक वस्तु का बनाने वाला कोई होता है?
उत्तर:- नहीं , जो वस्तु बनती अथवा बनाई जाती है उसका बनाने वाला कोई होता है। अर्थापत्ति प्रमाण:- अर्थात कोई वस्तु ऐसी भी होगी जो कभी नहीं बनती। उसी को ईश्वर कहते हैं।
अगला प्रश्न अब यह नहीं उठेगा की ईश्वर का बनाने वाला कौन, और उनकी और(नास्तिक) से यदि फिर भी ईश्वर के अनादि होने पर सन्देह किया तो अगला प्रश्न हमारा होगा कि आप यह बताएं, यदि मूल उपादान कारण प्रकृति अनादि हो सकती है जिसको आज का भौतिक विज्ञान भी मानता है, तो मूल निमित्त कारण ईश्वर को अनादि मानने में क्या कठिनाई?? तो इसके बाद उनके पास कोई उत्तर नहीं होगा, सिवाय विषय बदलने के....।।
अतः इस लेख के माध्यम से कहने का तात्पर्य यही है कि हमारे पक्ष की मजबूती में हमारा प्रमाण और उत्तर की प्रस्तुति दोनों ही मुख्य विषय है हमें इन दोनों पर विशेष ध्यान देना चाहिए, आज नास्तिकता का मुख्य कारण उत्तर की ठीक प्रकार से प्रस्तुति न करना भी है, अतः हे प्रिय मित्रों! ध्यान रहे कि सत्य की विजय स्वयं नहीं होती अपितु सत्य को जिताना पड़ता है।
आप सभी का धन्यवाद।।🙏

बिलकुल सही बात 👏👏
ReplyDeleteBahut achaa example deye, or samjh bhi aaya thank
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